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Showing posts from October, 2010

वाट ऍन आईडिया सर जी

“Only first class business and that in first class way......” David Ogilvy की ये लाइने विज्ञापन जगत की रीढ़ की हड्डी मानी जाती हैं, David Ogilvy ने विज्ञापन जगत को नायब नुस्खे दिए हैं 1948 में उन्होंने अपनी फार्म की शुरुआत की,जो बाद में Ogilvy & Mather के नाम से जानी गई ,,,,,,और जिस समय काम शुरू किया उनका एक भी ग्राहक नही था लेकिन ग्राहक की नब्ज पकड़ने में माहिर थे और कुछ ही वर्षो में उनकी कंपनी दुनिया की आठ बड़ी विज्ञापन जगत की कंपनी में से एक बनी और कई नामी ब्रांड्स को उन्होनी नई पहचान दी जिनमे Rolls-Royce ,American Express, Sears, Ford, Shell, Barbie, Pond's, Dove शामिल है ,और जुलाई 1999 को फ्रांस में उनका निधन हुआ विज्ञापन और ग्राहक के बीच रिश्ता कायम रखने के बारे में उनका कहना था की "ग्राहक का ध्यान खीचने के लिए आपका आईडिया बड़ा होना चाहिए जो उसे कंपनी का उत्पाद खरीदने को आकर्षित करे, अन्यथ आपका विज्ञापन उस पानी के जहाज के समान हैं जो अँधेरे में गुज़र जाता हैं .........." Dove के विज्ञापन की लाइन “Darling I’m having extraordinary experience …..” इसका उदहारण है…

कर्तव्यों का निर्वहन बनाम् अधिकार की मांग

भारतीय सविधान के अनुच्छेद 51Aमें नागरिको को उनके 11 कर्तव्यों का बोध कराया गया हैं जबकि अनुच्छेद 12 से 35हमें हमारे अधिकारों के बारे में निर्देशित करता है ।हमारे कर्तव्योंकी बुनियाद इतनी शसक्त हैं की, उनका अनुपालन करना हमारे लिए गर्व की बात हैं …अब बात आती हैं की ,क्या …हम अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की बजाय अपने अधिकारों के प्रति ज्यादा सजग हैं ? किसी भी लोकतान्त्रिक व्यवस्था में कोई देश तब तक मानवीय मूल्यों में सर्वोपरि नही बन सकता जब तक वहां के नागरिक अपने कर्तव्यों का ठीक तरह से पालन नही करता ....| मसलन सड़क पर चलना हमारा अधिकार हैं लेकिन उसे रास्ट्रीय सम्पति होने के नाते उस पर गंदगी न फेलाना, ये हमारा कर्त्तव्य हैं ... पर मोटे तोर पर आंकलन करे तो पता चलता हैं की ज़्यादातर लोगों को ऐसा करने में शायद शर्म आती हैं, उदहारण के तौर पर हमारे देश की परिवहन व्यवस्था में हमारे कर्तव्यों की कमी साफ तोर पर देखी जा सकती हैंराजधानी दिल्ली में रास्ट्र मंडल खेल में जितने वोलेंटर हैं उन्हें बाकायदा इस बात का प्रशिक्षण दिया गया हैं की हमें किस तरह से मेहमानों से बात करनी हैं ....क्या आज हमें इस…